➤ 352 वोट की जरूरत थी, पक्ष में मिले सिर्फ 298 वोट
➤ 230 सांसदों ने किया विरोध, विधेयक पास नहीं हो सका
➤ 12 साल में पहली बार सरकार का संविधान संशोधन बिल फेल
नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। वोटिंग के दौरान 528 सांसदों ने भाग लिया, जिसमें 298 सांसदों ने समर्थन और 230 ने विरोध में मतदान किया।
हालांकि, इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट आवश्यक थे, जो सरकार जुटा नहीं पाई। इसके चलते लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने घोषणा की कि विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका।
यह पिछले करीब 12 वर्षों में पहली बार है जब केंद्र की Government of India द्वारा लाया गया कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो पाया।
इस विधेयक पर सदन में करीब 21 घंटे तक चर्चा चली, जिसमें 130 सांसदों ने भाग लिया, जिनमें 56 महिला सांसद भी शामिल रहीं। चर्चा के दौरान गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन का विरोध करना SC-ST सीटों के विस्तार का विरोध है।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक के पास न होने पर खेद जताते हुए कहा कि यह महिलाओं को अधिकार देने का ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष ने गंवा दिया।
दूसरी ओर, नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रयास था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोका।
क्या था विधेयक में प्रस्ताव?
इस संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव था। साथ ही परिसीमन के बाद 33% महिला आरक्षण लागू करने और राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना शामिल थी।



